Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 163

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- शुनः शेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
यो꣡गे꣢योगे त꣣व꣡स्त꣢रं꣣ वा꣡जे꣢वाजे हवामहे । स꣡खा꣢य꣣ इ꣡न्द्र꣢मू꣣त꣡ये꣢ ॥१६३॥

यो꣡गे꣢꣯योगे । यो꣡गे꣢꣯ । यो꣣गे । तव꣡स्त꣢रम् । वा꣡जे꣢꣯वाजे । वा꣡जे꣢꣯ । वा꣣जे । हवामहे । स꣡खा꣢꣯यः । स । खा꣣यः । इ꣡न्द्र꣢म् । ऊ꣣त꣡ये꣢ ॥१६३॥

Mantra without Swara
योगेयोगे तवस्तरं वाजेवाजे हवामहे । सखाय इन्द्रमूतये ॥

योगेयोगे । योगे । योगे । तवस्तरम् । वाजेवाजे । वाजे । वाजे । हवामहे । सखायः । स । खायः । इन्द्रम् । ऊतये ॥१६३॥

Samveda - Mantra Number : 163
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(वाजे वाजे) प्रत्येक लड़ाई में (योगे, योगे) प्रत्येक ऐसे प्रवसर में वा योग में (सखायः) हम मित्र (तवस्तरम्) अतिबल (इन्द्रम्) राजी वा परमात्मा की (ऊतये) रक्षा के लिये (हवामहे) पुकार करें॥
मनुष्यों को परस्पर मित्र होना चाहिये तथा योगानुष्ठान के शत्रु काम क्रोधादि से बचने को परमात्मा और लौकिक कार्यों के शत्रु दस्यु आदि से लड़ाई के समय राजा की सहायता ग्रहण करनी चाहिये॥
Footnote
ऋ० १।३।७॥