Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1600

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स्तो꣣त्र꣡ꣳ रा꣢धानां पते꣣ गि꣡र्वा꣢हो वीर꣣ य꣡स्य꣢ ते । वि꣡भू꣢तिरस्तु सू꣣नृ꣡ता꣢ ॥१६००॥

स्तो꣣त्र꣢म् । रा꣣धानाम् । पते । गि꣡र्वा꣢꣯हः । वी꣣र । य꣡स्य꣢꣯ । ते꣣ । वि꣡भू꣢꣯तिः । वि । भू꣣तिः । अस्तु । सूनृ꣡ता꣢ । सू꣣ । नृ꣡ता꣢꣯ ॥१६००॥

Mantra without Swara
स्तोत्रꣳ राधानां पते गिर्वाहो वीर यस्य ते । विभूतिरस्तु सूनृता ॥

स्तोत्रम् । राधानाम् । पते । गिर्वाहः । वीर । यस्य । ते । विभूतिः । वि । भूतिः । अस्तु । सूनृता । सू । नृता ॥१६००॥

Samveda - Mantra Number : 1600
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(वीर) हे शूरवीर ! (राधानां पते) धनों के पति ! राजन् ! वा परमेश्वर ! (यस्य) जिस (गिर्वाहः) स्तुतिरूप वाणियों से वहन किये हुए (ते) तेरी (स्तोत्रम्) स्तुति की जाती है। उस तेरी (विभूतिः) विभूति (सूनृता) प्यारी और सच्ची (अस्तु) होवे॥
‘परमेश्वर की विभूति प्यारी सच्ची होवे’ कहने से यह तात्पर्य नहीं कि परमेश्वर के प्रति आशिष् हो किन्तु लोक में परमेश्वर की सच्ची और प्यारी विभूति विश्वास में आवे, यह लोक के प्रति आशिष् है॥
Footnote
ऋ० १। ३०। ५ में भी॥