Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1586

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- सुकक्ष आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
क꣢या꣣ त्वं꣡ न꣢ ऊ꣣त्या꣡भि प्र म꣢꣯न्दसे वृषन् । क꣡या꣢ स्तो꣣तृ꣢भ्य꣣ आ꣡ भ꣢र ॥१५८६॥

क꣡या꣢꣯ । त्वम् । नः꣣ । ऊत्या꣢ । अ꣡भि꣢ । प्र । म꣣न्दसे । वृषन् । क꣡या꣢꣯ । स्तो꣣तृ꣡भ्यः꣢ । आ । भ꣣र ॥१५८६॥

Mantra without Swara
कया त्वं न ऊत्याभि प्र मन्दसे वृषन् । कया स्तोतृभ्य आ भर ॥

कया । त्वम् । नः । ऊत्या । अभि । प्र । मन्दसे । वृषन् । कया । स्तोतृभ्यः । आ । भर ॥१५८६॥

Samveda - Mantra Number : 1586
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(वृषन्) हे कामनापूरक ! परमेश्वर ! (त्वम्) तुम (कया) त्तपनी अकथनीय अलौकिक (ऊत्या) रक्षा से (नः) हम भक्तों के लिये (अभि प्र मन्दसे) सर्वतः बहुत आनन्द देते हो, सो (स्तोतृम्यः) स्तुति प्रार्थना करने वालों के लिये (कया) साधारण पुरुष की समझ में न आने वाली रक्षा वा कृपा से (आभर) सुखभोग की सामग्री भरपूर करो॥
Footnote
ऋग्वेद ८। ९३। १९ में भी॥