Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1550

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- उशना काव्यः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
दा꣡शे꣢म꣣ क꣢स्य꣣ म꣡न꣢सा य꣣ज्ञ꣡स्य꣢ सहसो यहो । क꣡दु꣢ वोच इ꣣दं꣡ नमः꣢꣯ ॥१५५०॥

दा꣡शे꣢꣯म । क꣡स्य꣢꣯ । म꣡न꣢꣯सा । य꣣ज्ञ꣡स्य꣢ । स꣣हसः । यहो । क꣢त् । उ꣣ । वोचे । इद꣢म् । न꣡मः꣢꣯ ॥१५५०॥

Mantra without Swara
दाशेम कस्य मनसा यज्ञस्य सहसो यहो । कदु वोच इदं नमः ॥

दाशेम । कस्य । मनसा । यज्ञस्य । सहसः । यहो । कत् । उ । वोचे । इदम् । नमः ॥१५५०॥

Samveda - Mantra Number : 1550
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 15; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(सहसः) बल के (यहो) सन्तान तुल्य ! बल से अरणियों से उत्पन्न किया जाने से हे अग्ने ! अथवा बल = योगबल से साक्षात् किया जाने से हे परमेश्वर ! (कस्य) कैसे (यज्ञस्य) यज्ञ के हव्य वा शुद्ध अन्तःकरण का (मनसा) हृदय वा ज्ञान से (दाशेम) हम दान करें (उ) और (कद्) कौन (इदं नमः) “यह हव्य है” वा “यह नमस्कार है” ऐसा (वोचः) कहे ?।
Footnote
ऋग्वेद ८। ८४। ५ में भी॥