Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1543

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- विरूप आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
म꣣न्द्र꣡ꣳ होता꣢꣯रमृ꣣त्वि꣡जं꣢ चि꣣त्र꣡भा꣢नुं वि꣣भा꣡व꣢सुम् । अ꣣ग्नि꣡मी꣢डे꣣ स꣡ उ꣢ श्रवत् ॥१५४३॥

मन्द्र꣢म् । हो꣡ता꣢꣯रम् । ऋ꣣त्वि꣡ज꣢म् । चि꣣त्र꣡भा꣢नुम् । चि꣣त्र꣢ । भा꣣नुम् । विभा꣡व꣢सुम् । वि꣣भा꣢ । व꣣सुम् । अग्नि꣢म् । ई꣣डे । सः꣢ । उ꣣ । श्रवत् ॥१५४३॥

Mantra without Swara
मन्द्रꣳ होतारमृत्विजं चित्रभानुं विभावसुम् । अग्निमीडे स उ श्रवत् ॥

मन्द्रम् । होतारम् । ऋत्विजम् । चित्रभानुम् । चित्र । भानुम् । विभावसुम् । विभा । वसुम् । अग्निम् । ईडे । सः । उ । श्रवत् ॥१५४३॥

Samveda - Mantra Number : 1543
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 15; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(मन्द्रम्) मोद = हर्षदायक (होतारम्) कर्मों के फलदाता वा देवों के दूत (ऋत्विजम्) प्रत्येक ऋतु में यजनीय (चित्रभानुम्) विचित्र प्रकाशों वाले (विभावसुम्) विविध प्रकाश के धनी (अग्निम्) ईश्वर वा अग्नि की (ईडे) स्तुति करता हूँ, (सः) वह अग्नि (उ) अवश्य (श्रवत्) सुने = स्वीकृत करे।।
“तस्य मासा” उस (परमेश्वर) के प्रकाश से ही यह सब (सूर्यादि) प्रकाशता है, इत्यादि उपनिषदों में उसी के तेज से सूर्यादि तेजस्वियों में विविध तेज होना पाया जाता है इस कारण चित्रभानु आदि विशेषण परमेश्वर पक्ष में सुवच हैं॥
Footnote
ऋ० ८। ४४। ६ में भी॥