Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 154

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः, वामदेवो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
सो꣡मः꣢ पू꣣षा꣡ च꣢ चेततु꣣र्वि꣡श्वा꣢साꣳ सुक्षिती꣣ना꣢म् । दे꣣वत्रा꣢ र꣣꣬थ्यो꣢꣯र्हि꣣ता꣢ ॥१५४

सो꣡मः꣢꣯ । पू꣣षा꣢ । च꣣ । चेततुः । वि꣡श्वा꣢꣯साम् । सु꣣क्षितीना꣢म् । सु꣣ । क्षितीना꣢म् । दे꣣वत्रा꣢ । र꣣थ्योः꣢꣯ । हि꣣ता꣢ ॥१५४॥

Mantra without Swara
सोमः पूषा च चेततुर्विश्वासाꣳ सुक्षितीनाम् । देवत्रा रथ्योर्हिता ॥१५४

सोमः । पूषा । च । चेततुः । विश्वासाम् । सुक्षितीनाम् । सु । क्षितीनाम् । देवत्रा । रथ्योः । हिता ॥१५४॥

Samveda - Mantra Number : 154
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(देवत्राः) सव देवतों में (पूषा) पुष्टिकर्त्ता इन्द्र सूर्य (च) और (सोमः) चन्द्रमा (चेततु) चेताते हैं (विश्वासामः) और समस्त (सुक्षितीनाम्) पृथिव्यादि लोकों के (रथ्योः) समविषम मार्गों में (हिता) हितकारक हैं॥
Footnote
अष्टाध्यायी ६।३।१३७॥ ७।१।३९ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये। सायणाचार्य ने “ रथ्यः, अहिता” ऐसा पदच्छेद पदपाठ और विवरण के विरुद्ध किया है, यह सामश्रमी सत्यव्रत जी भी स्वीकार करते हैं॥