Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1538

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- विश्वामित्रो गाथिनः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ई꣣डे꣡न्यो꣢ नम꣣꣬स्य꣢꣯स्ति꣣र꣡स्तमा꣢꣯ꣳसि दर्श꣣तः꣢ । स꣢म꣣ग्नि꣡रि꣢ध्यते꣣ वृ꣡षा꣢ ॥१५३८॥

ई꣣डे꣡न्यः꣢ । न꣣मस्यः꣢ । ति꣣रः꣢ । त꣡मा꣢꣯ꣳसि । द꣣र्शतः꣢ । सम् । अ꣣ग्निः꣢ । इ꣣ध्यते । वृ꣡षा꣢꣯ ॥१५३८॥

Mantra without Swara
ईडेन्यो नमस्यस्तिरस्तमाꣳसि दर्शतः । समग्निरिध्यते वृषा ॥

ईडेन्यः । नमस्यः । तिरः । तमाꣳसि । दर्शतः । सम् । अग्निः । इध्यते । वृषा ॥१५३८॥

Samveda - Mantra Number : 1538
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 15; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(ईडेन्यः) वर्णनीय, (नमस्यः) नमने योग्य वा हव्य अन्न देने योग्य, (तमांसि) अंधियारों को (तिरः) तिरस्कृत करता हुआ, (दर्शतः) ज्ञान द्वारा वा प्रकाश द्वारा मार्गदर्शक, (वृषा) कामनाओं का वर्षाने वाला वा होम से वृष्टि का हेतु (अग्निः) ज्ञानस्वरूप परमेश्वर वा भौतिक अग्नि (सम्) भले प्रकार (इध्यते) ध्यान किया जाता वा यज्ञकुण्ड में सुलगाया जाता है॥
Footnote
ऋ० ३। २७। १३ में भी॥