Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 153

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- शुनः शेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
रे꣣व꣡ती꣢र्नः सध꣣मा꣢द꣣ इ꣡न्द्रे꣢ सन्तु तु꣣वि꣡वा꣢जाः । क्षु꣣म꣢न्तो꣣ या꣢भि꣣र्म꣡दे꣢म ॥१५३॥

रे꣣व꣡तीः꣢ । नः꣣ । सधमा꣡दे꣢ । स꣣ध । मा꣡दे꣢꣯ । इ꣡न्द्रे꣢꣯ । स꣣न्तु । तुवि꣡वा꣢जाः । तु꣣वि꣢ । वा꣣जाः । क्षुम꣡न्तः꣢ । या꣡भिः꣢꣯ । म꣡दे꣢꣯म ॥१५३॥

Mantra without Swara
रेवतीर्नः सधमाद इन्द्रे सन्तु तुविवाजाः । क्षुमन्तो याभिर्मदेम ॥

रेवतीः । नः । सधमादे । सध । मादे । इन्द्रे । सन्तु । तुविवाजाः । तुवि । वाजाः । क्षुमन्तः । याभिः । मदेम ॥१५३॥

Samveda - Mantra Number : 153
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्रे) परमेश्वर वा राजा वा देवविशेष के (सधमादे) सहित वा अनुकूल होने पर (नः) हमारी (रेवतीः) धन धान्यादि वाली (तुविवाजाः) बहुत बलयुक्त [प्रजा] (सन्तु) होवें (याभिः) जिनके साथ (क्षुमन्तः) बहुत भोजनादि सामग्रीयुक्त हम (मदेम) हर्ष को प्राप्त हों।
परमेश्वर और राजा के प्रसन्न रहने तथा वृष्टिदेव के अनुकूल रहने पर सब प्रजा को उत्तम धन धान्य शारीरिक आत्मिक और सामाजिक बल की प्राप्ति हो, जिससे हम सब उन प्रजानों सहित आनन्द में रहें।
Footnote
अष्टाध्यायी ६।१।३७॥ ८।२।१५॥ ७।१।३९॥ ६।३।९६॥ निघण्टु १।७॥ २। ९॥ ३।१ इत्यादि के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ ऋ० १। २९। १३ में भी॥