Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 150

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- श्रुतकक्षः सुकक्षो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
उ꣡प꣢ नो꣣ ह꣡रि꣢भिः सु꣣तं꣢ या꣣हि꣡ म꣢दानां पते । उ꣡प꣢ नो꣣ ह꣡रि꣢भिः सु꣣त꣢म् ॥१५०॥

उ꣡प꣢꣯ । नः꣣ । ह꣡रि꣢꣯भिः । सु꣣त꣢म् । या꣣हि꣢ । म꣣दानाम् । पते । उ꣡प꣢꣯ । नः꣣ । ह꣡रि꣢꣯भिः । सु꣣त꣢म् ॥१५०॥

Mantra without Swara
उप नो हरिभिः सुतं याहि मदानां पते । उप नो हरिभिः सुतम् ॥

उप । नः । हरिभिः । सुतम् । याहि । मदानाम् । पते । उप । नः । हरिभिः । सुतम् ॥१५०॥

Samveda - Mantra Number : 150
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(मदानां पते) आनन्दों के पति ! [इन्द्र ! परमात्मन्] (नः) हम में से (सुतम्) आपके स्तोता को (हरिभिः) व्यापक गुणों से (उप, याहि) प्राप्त हूजिये (नः, सुतं, हरिभिः, उपयाहि) हम में से, स्तुति करने वाले को, प्राप्त हूजिये। यह पुनरुक्ति अधिक इच्छा को प्रकाशित करती है।
देव पक्ष में—(मदानां पते) सोमों के पति ! [इन्द्र !] (नः) हमारे (सुतम्) सम्पादित सोम को (हरिभिः) व्यापक किरणरूप अश्वों से (उप, याहि) प्राप्त हो॥
अर्थात् मनुष्यों को ऐसा करना चाहिये जिससे यज्ञ में इन्द्र नामक विद्युत् को सोमरस पहुँचे॥
Footnote
निघण्टु १।१५॥ २।७॥ ३।१६ इत्यादि के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये। ऋ० ८।९३।३१ में भी॥