Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1499

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ꣡ नो꣢ भज पर꣣मे꣡ष्वा वाजे꣢꣯षु मध्य꣣मे꣡षु꣢ । शि꣢क्षा꣣ व꣢स्वो꣣ अ꣡न्त꣢मस्य ॥१४९९॥

आ꣢ । नः꣣ । भज । परमे꣡षु꣢ । आ । वाजे꣡षु꣢꣯ । म꣣ध्यमे꣡षु꣢ । शि꣡क्ष꣢꣯ । व꣡स्वः꣢꣯ । अ꣡न्त꣢꣯मस्य ॥१४९९॥

Mantra without Swara
आ नो भज परमेष्वा वाजेषु मध्यमेषु । शिक्षा वस्वो अन्तमस्य ॥

आ । नः । भज । परमेषु । आ । वाजेषु । मध्यमेषु । शिक्ष । वस्वः । अन्तमस्य ॥१४९९॥

Samveda - Mantra Number : 1499
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 14; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
अग्ने ! (परमेषु) द्युलोकस्थ परले (वाजेषु) अन्नों में (नः) हम को (आ भज) पहुंचा और (मध्यमेषु) अन्तरिक्षस्थ बीचले अन्नों में (आ) हमें पहुँचा तथा (अन्तमस्य) वरले समीपस्थ भूलोक के (वस्वः) धन का (शिक्ष) हमें दान कर॥
३ लोकों के धन धान्य होम किये अग्नि द्वारा हमें प्राप्त हों, यह भाव है॥
Footnote
ऋ० १। २७। ५ में भी॥