Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 149

1875 Mantra
Devata- मरुतः Rishi- बिन्दुः पूतदक्षो वा आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
गौ꣡र्ध꣢यति म꣣रु꣡ता꣣ꣳ श्रव꣣स्यु꣢र्मा꣣ता꣢ म꣣घो꣡ना꣢म् । यु꣣क्ता꣢꣫ वह्नी꣣ र꣡था꣢नाम् ॥१४९॥

गौः꣢ । ध꣣यति । मरु꣡ता꣢म् । श्र꣣वस्युः꣢ । मा꣣ता꣢ । म꣣घो꣡ना꣢म् । यु꣣क्ता꣢ । व꣡ह्निः꣢꣯ । र꣡था꣢꣯नाम् ॥१४९॥

Mantra without Swara
गौर्धयति मरुताꣳ श्रवस्युर्माता मघोनाम् । युक्ता वह्नी रथानाम् ॥

गौः । धयति । मरुताम् । श्रवस्युः । माता । मघोनाम् । युक्ता । वह्निः । रथानाम् ॥१४९॥

Samveda - Mantra Number : 149
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(मघोनाम्) धन धान्यादि वालों की (माता) मातृतुल्य (श्रवस्युः) अन्न उत्पन्न करना चाहने वाली (रथानां मरुताम्) गमनशील वायुओं की (वह्नी) साथ घुमाने वाली (गौः) पृथिवी (युक्ता) वायु से जुड़ी हुई (धयति) पीती है॥
पूर्वमन्त्रानुसार जब इन्द्र और पूषा वर्षा और पुष्टि करते हैं तव पृथिवी वायुत्रों को साथ घुमाती हुई उस वृष्टि पुष्टि को धारती है और उससे अन्न उत्पन्न करना चाहती है।
Footnote
निघण्टु १।१॥ २।७॥ २।१० अष्टाध्यायी ३।१। ८॥ २।३।१७०॥ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥। ऋ० ८।९४।१ में भी॥