Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1481

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- हर्यतः प्रागाथः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ते꣡ जा꣢नत꣣ स्व꣢मो꣣क्यं꣢३꣱सं꣢ व꣣त्सा꣢सो꣣ न꣢ मा꣣तृ꣡भिः꣢ । मि꣣थो꣡ न꣢सन्त जा꣣मि꣡भिः꣢ ॥१४८१॥

ते । जा꣣नत । स्व꣢म् । ओ꣣क्य꣢म् । सम् । व꣣त्सा꣡सः꣢ । न । मा꣣तृ꣡भिः꣢ । मि꣣थः꣢ । न꣣सन्त । जामि꣡भिः꣢ ॥१४८१॥

Mantra without Swara
ते जानत स्वमोक्यं३सं वत्सासो न मातृभिः । मिथो नसन्त जामिभिः ॥

ते । जानत । स्वम् । ओक्यम् । सम् । वत्सासः । न । मातृभिः । मिथः । नसन्त । जामिभिः ॥१४८१॥

Samveda - Mantra Number : 1481
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 6;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(ते) जो सोमाऽन्न से मिश्रित अग्नि में हुत अन्य भाग हैं, वे (स्वम्) अपने (ओक्यम्) स्थान को (जानते) जानते हुए से (जामिभिः) मेघजलों से (मिथः) परस्पर (नसन्त) जा मिलते हैं। दृष्टान्त — (न) जैसे (वत्सासः) बछड़े (मातृभिः) गौवों से (सम्) जा मिलते हैं, तद्वत्॥
Footnote
निघण्टु १। १२ में जामि = जल नाम है॥
ऋ० ८। ७२। १४ में भी॥