Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1477

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- विश्वामित्रो गाथिनः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
हो꣡ता꣢ दे꣣वो꣡ अम꣢꣯र्त्यः पु꣣र꣡स्ता꣢देति मा꣣य꣡या꣢ । वि꣣द꣡था꣢नि प्रचो꣣द꣡य꣢न् ॥१४७७॥

हो꣡ता꣢꣯ । दे꣣वः꣢ । अ꣡म꣢꣯र्त्यः । अ । म꣣र्त्यः । पु꣡रस्ता꣢त् । ए꣣ति । माय꣡या꣢ । वि꣣द꣡था꣢नि । प्र꣣चोद꣡य꣢न् । प्र꣣ । चोद꣡य꣢न् ॥१४७७॥

Mantra without Swara
होता देवो अमर्त्यः पुरस्तादेति मायया । विदथानि प्रचोदयन् ॥

होता । देवः । अमर्त्यः । अ । मर्त्यः । पुरस्तात् । एति । मायया । विदथानि । प्रचोदयन् । प्र । चोदयन् ॥१४७७॥

Samveda - Mantra Number : 1477
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(होता) होम का साधक (देवः) प्रकाशमान (अमर्त्यः) अमर अग्नि, (मायया) बुद्धि से (विदथानि) ज्ञानेन्द्रियों को (प्रचोदयन्) प्रेरित करता हुआ (पुरस्तात्) आगे आकाश को (एति) जाता है।
अग्नि हमारे समान मरणधर्मा न होने से अमर, प्रकाशमान होने से देव, देवों का दूत होने से होता, और प्रकाश से बुद्धि का प्रेरक होने से ज्ञानेन्द्रियों का भी प्रेरक है॥
Footnote
ऋग्वेद ३। २७। ७ में भी॥