Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1461

1875 Mantra
Devata- सरस्वती Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ꣣त꣡ नः꣢ प्रि꣣या꣢ प्रि꣣या꣡सु꣢ स꣣प्त꣡स्व꣢सा꣣ सु꣡जु꣢ष्टा । स꣡र꣢स्वती꣣ स्तो꣡म्या꣢ भूत् ॥१४६१॥

उ꣣त꣢ । नः꣢ । प्रिया꣢ । प्रि꣣या꣡सु꣢ । स꣣प्त꣡स्व꣢सा । स꣣प्त꣢ । स्व꣣सा । सु꣡जु꣢꣯ष्टा । सु । जु꣣ष्टा । स꣡र꣢꣯स्वती । स्तो꣡म्या꣢꣯ । भू꣣त् ॥१४६१॥

Mantra without Swara
उत नः प्रिया प्रियासु सप्तस्वसा सुजुष्टा । सरस्वती स्तोम्या भूत् ॥

उत । नः । प्रिया । प्रियासु । सप्तस्वसा । सप्त । स्वसा । सुजुष्टा । सु । जुष्टा । सरस्वती । स्तोम्या । भूत् ॥१४६१॥

Samveda - Mantra Number : 1461
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(उत) और पूर्वोक्त सर्वज्ञ परमात्मा की स्तुति के लिये (नः) हमारी (प्रियासु) प्यारियों में (प्रिया) अतिप्यारी मधुरस्वरयुक्ता (सप्त स्वसा) गायत्री आदि सात ७ छन्दोजातिरूप बहनों वाली (सुजुष्टा) भले प्रकार अभ्यास से सेवित (स्तोम्या) प्रशंसनीय (सरस्वती) वाणी [निघ० १। ११] (भूत्) होवे॥
अर्थात् जब हम वेदसूक्तों से परमात्मा की स्तुति प्रार्थना करें तो हमारी वाणी अतिप्रिय मधुर गायत्री आदि सात ७ छन्दों में विभक्त अच्छे प्रकार अभ्यस्त और प्रशंसनीय हो।
Footnote
ऋ० ६। ६१। १० में भी॥