Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1452

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- सुकक्ष आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣢ न꣣ इ꣡न्द्रः꣢ शि꣣वः꣡ सखाश्वा꣢꣯व꣣द्गो꣢म꣣द्य꣡व꣢मत् । उ꣣रु꣡धा꣢रेव दोहते ॥१४५२॥

सः꣢ । नः꣣ । इन्द्रः । शि꣡वः꣢꣯ । स꣡खा꣢꣯ । स । खा꣣ । अ꣡श्वा꣢꣯वत् । गो꣡म꣢꣯त् । य꣡व꣢꣯मत् । उ꣣रु꣡धा꣢रा । उ꣣रु꣢ । धा꣣रा । इव । दोहते ॥१४५२॥

Mantra without Swara
स न इन्द्रः शिवः सखाश्वावद्गोमद्यवमत् । उरुधारेव दोहते ॥

सः । नः । इन्द्रः । शिवः । सखा । स । खा । अश्वावत् । गोमत् । यवमत् । उरुधारा । उरु । धारा । इव । दोहते ॥१४५२॥

Samveda - Mantra Number : 1452
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(सः) वह (शिवः) सुखस्वरूप और सुखदायक (सखा) याज्ञिक और यजनीय सम्बन्ध से मित्र (इन्द्रः) इन्द्रनामक वायुविशेष (नः) हमारे लिये (अश्वावत्) अश्वों या प्राणों से युक्त (गोमत्) गौ वा इन्द्रियों से युक्त (यवमत्) जौ और अन्य धान्यों से युक्त धन को (उरुधारा) बहुत दुधार गौ के (इव) समान (दोहते) दुहकर पूर्ण करता है।
Footnote
अष्टाध्यायी ८। २। ९ संस्कृतभाष्य में देखिये॥
ऋ० ८। ९३। ३ में भी॥