Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1428

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कुत्स आङ्गिरसः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ꣣भी꣡ नो꣢ अर्ष दि꣣व्या꣡ वसू꣢꣯न्य꣣भि꣢꣫ विश्वा꣣ पा꣡र्थि꣢वा पू꣣य꣡मा꣢नः । अ꣣भि꣢꣫ येन꣣ द्र꣡वि꣢णम꣣श्न꣡वा꣢मा꣣꣬भ्या꣢꣯र्षे꣣यं꣡ ज꣢मदग्नि꣣व꣡न्नः꣢ ॥१४२८॥

अभि꣢ । नः꣣ । अर्ष । दिव्या꣢ । व꣡सू꣢꣯नि । अ꣣भि꣢ । वि꣡श्वा꣢꣯ । पा꣡र्थि꣢꣯वा । पू꣣य꣡मा꣢नः । अ꣣भि꣢ । ये꣡न꣢꣯ । द्र꣡वि꣢꣯णम् । अ꣣श्न꣡वा꣢म । अ꣣भि꣢ । आर्षेय꣢म् । ज꣣मदग्निव꣢त् । ज꣣मत् । अग्निव꣢त् । नः꣣ ॥१४२८॥

Mantra without Swara
अभी नो अर्ष दिव्या वसून्यभि विश्वा पार्थिवा पूयमानः । अभि येन द्रविणमश्नवामाभ्यार्षेयं जमदग्निवन्नः ॥

अभि । नः । अर्ष । दिव्या । वसूनि । अभि । विश्वा । पार्थिवा । पूयमानः । अभि । येन । द्रविणम् । अश्नवाम । अभि । आर्षेयम् । जमदग्निवत् । जमत् । अग्निवत् । नः ॥१४२८॥

Samveda - Mantra Number : 1428
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 12; Khand » 6;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(पूयमानः) सांभ (नः) हमारे लिये (दिव्या) आकाशीय (वसूनि) धनों को (अभि अर्ष) सर्वतः प्राप्त कराता है और (विश्वा) सब (पार्थिवा) पृथिवी सम्बन्धी धनों को भी (अभि) प्राप्त कराता है तथा (येन) जिस बल वा नीरोगता से (द्रविणम्) उस आकाशीय और पार्थिव धन को हम (अश्नुवाम) भोग सकें वह भी (अभि) प्राप्त कराता है और (नः) हमारे लिये (जमदग्निवत्) आँख के समान [श० ८। १। २५] (आर्षेयम्) अन्य ज्ञानेन्द्रियों के तेज को भी (अभि) प्राप्त कराता है॥
Footnote
ऋ० ९। ९७। ५१ में भी॥