Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1406

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- सुतंभर आत्रेयः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣ग्नि꣡र्जु꣢षत नो꣣ गि꣢रो꣣ हो꣢ता꣣ यो꣡ मानु꣢꣯षे꣣ष्वा꣢ । स꣡ य꣢क्ष꣣द्दै꣢व्यं꣣ ज꣡न꣢म् ॥१४०६॥

अ꣣ग्निः꣢ । जु꣣षत । नः । गि꣡रः꣢꣯ । हो꣡ता꣢꣯ । यः । मा꣡नु꣢꣯षेषु । आ । सः । य꣣क्षत् । दै꣡व्य꣢꣯म् । ज꣡न꣢꣯म् ॥१४०६॥

Mantra without Swara
अग्निर्जुषत नो गिरो होता यो मानुषेष्वा । स यक्षद्दैव्यं जनम् ॥

अग्निः । जुषत । नः । गिरः । होता । यः । मानुषेषु । आ । सः । यक्षत् । दैव्यम् । जनम् ॥१४०६॥

Samveda - Mantra Number : 1406
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 12; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(होता) वायु आदि देवों का बुलाने वाला वा होमसाधक (अग्निः) अग्नि (मानुषेषु) मनुष्यों के लोकों में (आ) वास करता है (यः) जो कि (नः) हमारी (गिरः) वारियों को (जुषत) सेवित करता है अर्थात् हमारे अभीष्ट पूरे करना है (सः) वह अग्नि (दैव्यम) द्युलोक की (जनम्) सृष्टि का (यक्षत्) यजन करे।
Footnote
ऋ० ५। १३। ३ में भी॥