Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1404

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- तिरश्चीराङ्गिरसः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्र꣢ शु꣣द्धो꣡ हि नो꣢꣯ र꣣यि꣢ꣳ शु꣣द्धो꣡ रत्ना꣢꣯नि दा꣣शु꣡षे꣢ । शु꣣द्धो꣢ वृ꣣त्रा꣡णि꣢ जिघ्नसे शु꣣द्धो꣡ वाज꣢꣯ꣳ सिषाससि ॥१४०४॥

इ꣡न्द्र꣢꣯ । शुद्धः । हि । नः꣣ । रयि꣢म् । शु꣣द्धः꣢ । र꣡त्ना꣢꣯नि । दा꣣शु꣡षे꣢ । शु꣣द्धः꣢ । वृ꣣त्रा꣡णि꣢ । जि꣣घ्नसे । शुद्धः꣢ । वा꣡ज꣢꣯म् । सि꣣षाससि ॥१४०४॥

Mantra without Swara
इन्द्र शुद्धो हि नो रयिꣳ शुद्धो रत्नानि दाशुषे । शुद्धो वृत्राणि जिघ्नसे शुद्धो वाजꣳ सिषाससि ॥

इन्द्र । शुद्धः । हि । नः । रयिम् । शुद्धः । रत्नानि । दाशुषे । शुद्धः । वृत्राणि । जिघ्नसे । शुद्धः । वाजम् । सिषाससि ॥१४०४॥

Samveda - Mantra Number : 1404
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 12; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) हे परमेश्वर ! (हि) क्योंकि आप (शुद्धः) पवित्र कारण (रयिम्) शुद्ध धन को (नः) हमारे लिए दीजिये (शुद्धः) आप पवित्र हैं सो (दाशुषे) दानी पुण्यात्मा पुरुष के लिये (रत्नानि) आप पवित्र मणि-मुक्तादि रत्न दीजिये (शुद्धः) आप शुद्ध हैं इससे (वृत्राणि) दुष्ट अशुद्ध राक्षसों का (जिघ्नसे) नाश करते हैं पर (शुद्धः) आप (वाजम्) शुद्ध अन्न को (सिषाससि) कर्मानुसार देना चाहते हैं॥
Footnote
ऋ० ८। ९५। ९ में भी॥