Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1403

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- तिरश्चीराङ्गिरसः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्र꣢ शु꣣द्धो꣢ न꣣ आ꣡ ग꣢हि शु꣣द्धः꣢ शु꣣द्धा꣡भि꣢रू꣣ति꣡भिः꣢ । शु꣣द्धो꣢ र꣣यिं꣡ नि धा꣢꣯रय शु꣣द्धो꣡ म꣢मद्धि सोम्य ॥१४०३॥

इ꣡न्द्र꣢꣯ । शु꣣द्धः꣢ । नः꣣ । आ꣢ । ग꣣हि । शुद्धः꣢ । शु꣣द्धा꣡भिः꣢ । ऊ꣣ति꣡भिः꣢ । शु꣣द्धः꣢ । र꣡यि꣢म् । नि । धा꣣रय । शुद्धः꣢ । म꣡मद्धि । सोम्य ॥१४०३॥

Mantra without Swara
इन्द्र शुद्धो न आ गहि शुद्धः शुद्धाभिरूतिभिः । शुद्धो रयिं नि धारय शुद्धो ममद्धि सोम्य ॥

इन्द्र । शुद्धः । नः । आ । गहि । शुद्धः । शुद्धाभिः । ऊतिभिः । शुद्धः । रयिम् । नि । धारय । शुद्धः । ममद्धि । सोम्य ॥१४०३॥

Samveda - Mantra Number : 1403
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 12; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) हे परमेश्वर ! (शुद्धः) पवित्र करने वाले = पावन आप (नः) हम को (आगहि) प्राप्त हों (शुद्धः) पावन आप (शुद्धाभिः) पावनी (ऊतिभिः) रक्षाओं से हमारी रक्षा करें (शुद्धः) पावन आप (रयिम्) निश्छल व्यवहार द्वारा प्राप्त धन को (निधारयः) निरा धारण करावें (सोम्य) हे अमृतस्वरूप ! (शुद्धः) पावन आप (ममद्धि) हम पर प्रसन्न हों॥
Footnote
ऋ० ८। ८५। ८ का पाठान्तर संस्कृतभाष्य में देखिये॥