Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1397

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ग꣡र्भे꣢ मा꣣तुः꣢ पि꣣तु꣢ष्पि꣣ता꣡ वि꣢दिद्युता꣣नो꣢ अ꣣क्ष꣡रे꣢ । सी꣡द꣢न्नृ꣣त꣢स्य꣣ यो꣢नि꣣मा꣢ ॥१३९७॥

ग꣡र्भे꣢꣯ । मा꣣तुः꣢ । पि꣣तुः꣢ । पि꣣ता꣢ । वि꣣दिद्युतानः꣢ । वि꣣ । दिद्युतानः꣢ । अ꣣क्ष꣡रे꣢ । सी꣡द꣢꣯न् । ऋ꣣त꣡स्य꣢ । यो꣡नि꣢꣯म् । आ ॥१३९७॥

Mantra without Swara
गर्भे मातुः पितुष्पिता विदिद्युतानो अक्षरे । सीदन्नृतस्य योनिमा ॥

गर्भे । मातुः । पितुः । पिता । विदिद्युतानः । वि । दिद्युतानः । अक्षरे । सीदन् । ऋतस्य । योनिम् । आ ॥१३९७॥

Samveda - Mantra Number : 1397
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 12; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
यहां पिता और माता शब्द से द्युलोक और पृथिवीलोक का ग्रहण है। श्रवण करते हैं कि “द्यौः पिता पृथिवी माता”। (मातुः) पृथिवी के (गर्भे) मध्य (अक्षरे) क्षरणरहित वेदिस्थान में (विदिद्युतानः) प्रकाशमान (पितुः) द्युलोक का [हव्य पहुँचा कर पालन करने से] (पिता) पालक अग्नि (ऋतस्य) यज्ञ की (योनिम्) उत्तर वेदि नामक स्थान में (आ-सीदन्) स्थित हुआ “वृत्रों का नाश करता है” यह पूर्व मन्त्र से से अन्वय है॥
Footnote
ऋग्वेद ६। १६। ३५ में भी॥