Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1387

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- प्रजापतिर्वैश्वामित्रो वाच्यो वा Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
आ꣢ जा꣣मि꣡रत्के꣢꣯ अव्यत भु꣣जे꣢꣫ न पु꣣त्र꣢ ओ꣣꣬ण्योः꣢꣯ । स꣡र꣢ज्जा꣣रो꣡ न योष꣢꣯णां व꣣रो꣢ न योनि꣢꣯मा꣣स꣡द꣢म् ॥१३८७॥

आ꣢ । जा꣣मिः꣢ । अ꣡त्के꣢꣯ । अ꣣व्यत । भुजे꣢ । न । पु꣣त्रः꣢ । पु꣣त् । त्रः꣢ । ओ꣣ण्योः꣣꣬ । स꣡र꣢꣯त् । जा꣣रः꣢ । न । यो꣡ष꣢꣯णाम् । व꣣रः꣢ । न । यो꣡नि꣢꣯म् । आ꣣स꣡द꣢म् । आ꣣ । स꣡द꣢꣯म् ॥१३८७॥

Mantra without Swara
आ जामिरत्के अव्यत भुजे न पुत्र ओण्योः । सरज्जारो न योषणां वरो न योनिमासदम् ॥

आ । जामिः । अत्के । अव्यत । भुजे । न । पुत्रः । पुत् । त्रः । ओण्योः । सरत् । जारः । न । योषणाम् । वरः । न । योनिम् । आसदम् । आ । सदम् ॥१३८७॥

Samveda - Mantra Number : 1387
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 12; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(जामिः) रसस्वरूप सोम (अत्के) आच्छादक दशापवित्र पर (आ अव्यत) सम्बद्ध होता और फिर (योनिम्) स्थान = द्रोणकलश में (आसदम्) स्थित होने को (सरत्) सरकता है। इसमें ३ दृष्टान्त १–(न) जैसे (पुत्रः) पुत्र (ओण्योः) द्यावा पृथिवी के समान माता पिता की (भुजे) गोद में और २–(न) जैसे (जारः) कामी पुरुष (योषणाम्) कामिनी स्त्री को नौर ३—(न) जैसे (वरः) विवाहला पुरुष कन्या को प्राप्त होता है॥
Footnote
ऋ० ९।१०१।१४ में भी॥ यहां से ४ ऋचाओं में मुग्ध पक्षपाती ज्वालप्रसाद भार्गव ने सब वैदिक मन्त्रों से निराला सीताराम का वर्णन करके अनर्थ किया है॥२॥