Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1365

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- त्र्यरुणस्त्रैवृष्णः, त्रसदस्युः पौरुकुत्स्यः Chhand- पिपीलिकामध्या अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अ꣡जी꣢जनो꣣ हि꣡ प꣢वमान꣣ सू꣡र्यं꣢ वि꣣धा꣢रे꣣ श꣡क्म꣢ना꣣ प꣡यः꣢ । गो꣡जी꣢रया꣣ र꣡ꣳह꣢माणः꣣ पु꣡र꣢न्ध्या ॥१३६५

अ꣡जी꣢꣯जनः । हि । प꣣वमान । सू꣡र्य꣢꣯म् । वि꣣धा꣡रे꣢ । वि꣣ । धा꣡रे꣢꣯ । श꣡क्म꣢꣯ना । प꣡यः꣢꣯ । गो꣡जी꣢꣯रया । गो । जी꣣रया । र꣡ꣳह꣢꣯माणः । पु꣡र꣢꣯न्ध्या । पु꣡र꣢꣯म् । ध्या꣣ ॥१३६५॥

Mantra without Swara
अजीजनो हि पवमान सूर्यं विधारे शक्मना पयः । गोजीरया रꣳहमाणः पुरन्ध्या ॥१३६५

अजीजनः । हि । पवमान । सूर्यम् । विधारे । वि । धारे । शक्मना । पयः । गोजीरया । गो । जीरया । रꣳहमाणः । पुरन्ध्या । पुरम् । ध्या ॥१३६५॥

Samveda - Mantra Number : 1365
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 11; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(पवमान) सोम ! (सूर्यम्) सूर्य किरण मण्डल के (विधारे) धारक गगनमण्डल में (शक्मना) बल से (रंहमाणः) वेग करता हुआ तू (गोजीरिया) किरणों के वेगयुक्त (पुरन्ध्या) दोनों द्यावापृथिवी के मध्य में (हि) ही (पयः) जल को (अजीजनः) उत्पन्न करता है॥
Footnote
निघण्टु १। १४॥ २। १५ अष्टाध्यायी ७।१।३९ के प्रमाण संस्कृत भाग्य में देखिये॥
ऋग्वेद ९। ११०। ३ में भी॥