Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1355

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- प्रगाथः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣣दा꣢ प꣣णी꣡न꣢रा꣣ध꣢सो꣣ नि꣡ बा꣢धस्व म꣣हा꣡ꣳ अ꣢सि । न꣢꣫ हि त्वा꣣ क꣢श्च꣣ न꣡ प्रति꣢꣯ ॥१३५५॥

पदा꣢ । प꣣णी꣢न् । अ꣣राध꣡सः꣢ । अ꣣ । राध꣡सः꣢ । नि । बा꣣धस्व । महा꣢न् । अ꣣सि । न꣢ । हि । त्वा꣣ । कः꣢ । च꣣ । न꣢ । प्र꣡ति꣢꣯ ॥१३५५॥

Mantra without Swara
पदा पणीनराधसो नि बाधस्व महाꣳ असि । न हि त्वा कश्च न प्रति ॥

पदा । पणीन् । अराधसः । अ । राधसः । नि । बाधस्व । महान् । असि । न । हि । त्वा । कः । च । न । प्रति ॥१३५५॥

Samveda - Mantra Number : 1355
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 11; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
पूर्व मन्त्र से “अद्रिवः” पद की अनुवृत्ति लाकर — हे परमेश्वर ! आप (महान्) बड़े (असि) हैं, (कश्चन) कोई भी (त्वा) आप के (प्रति) बराबर (नहि) नहीं है, सो आप (अराधसः) यज्ञार्थ धन न लगाने वाले (पणीन्) लोभियों को (पदा) व्याप्तिरूप लात से (निबाधस्व) पीड़ित कीजिये = दण्ड दीजिये॥
Footnote
ऋ० ८। ६४। २ में भी॥