Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1343

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
क꣣दा꣡ मर्त꣢꣯मरा꣣ध꣡सं꣢ प꣣दा꣡ क्षुम्प꣢꣯मिव स्फुरत् । क꣣दा꣡ नः꣢꣯ शुश्रव꣣द्गि꣢र꣣ इ꣡न्द्रो꣢ अ꣣ङ्ग꣢ ॥१३४३॥

क꣣दा꣢ । म꣡र्त꣢꣯म् । अ꣣राध꣡स꣢म् । अ꣣ । राध꣡स꣢म् । प꣣दा꣢ । क्षु꣡म्प꣢꣯म् । इ꣡व । स्फुरत् । कदा꣢ । नः꣣ । शुश्रवत् । गि꣡रः꣢꣯ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । अ꣣ङ्ग꣢ ॥१३४३॥

Mantra without Swara
कदा मर्तमराधसं पदा क्षुम्पमिव स्फुरत् । कदा नः शुश्रवद्गिर इन्द्रो अङ्ग ॥

कदा । मर्तम् । अराधसम् । अ । राधसम् । पदा । क्षुम्पम् । इव । स्फुरत् । कदा । नः । शुश्रवत् । गिरः । इन्द्रः । अङ्ग ॥१३४३॥

Samveda - Mantra Number : 1343
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 12;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(अंग) हे प्रिय ! परमेश्वर ! (इन्द्रः) परमेश्वर आप (नः) हमारी (गिरः) वाणी-प्रार्थनाओं को (कदा) कब (सुश्रवत्) अनुकूलता से सुनेंगे ? और (कदा) कब (अराधसम्) यज्ञ के विरोधी (मर्त्तम्) मनुष्य को (पदा) पाव से (क्षुम्पमिव) जैसे अहिच्छत्र = जो लकड़ी गल कर पृथिवी पर छत्राकार फूल जाती है उसको नष्ट कर देते हैं, ऐसे (स्फुरत्) नष्ट करेंगे ? अर्थात् कृपया शीघ्र हमारी प्रार्थना सुनिये॥
Footnote
निरुक्त ५। १६–१७ का प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥
ऋ० १। ६४। ८ में भी॥