Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1312

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- शतं वैखानसाः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡व꣢मान꣣꣬ व्य꣢꣯श्नुहि र꣣श्मि꣡भि꣢र्वाज꣣सा꣡त꣢मः । द꣡ध꣢त्स्तो꣣त्रे꣢ सु꣣वी꣡र्य꣢म् ॥१३१२

प꣡व꣢꣯मान । वि । अ꣣श्नुहि । रश्मि꣡भिः꣢ । वा꣣जसा꣡त꣢मः । वा꣣ज । सा꣡त꣢꣯मः । द꣡ध꣢꣯त् । स्तो꣣त्रे꣢ । सु꣣वी꣡र्य꣢म् । सु꣣ । वी꣢र्य꣢꣯म् ॥१३१२॥

Mantra without Swara
पवमान व्यश्नुहि रश्मिभिर्वाजसातमः । दधत्स्तोत्रे सुवीर्यम् ॥१३१२

पवमान । वि । अश्नुहि । रश्मिभिः । वाजसातमः । वाज । सातमः । दधत् । स्तोत्रे । सुवीर्यम् । सु । वीर्यम् ॥१३१२॥

Samveda - Mantra Number : 1312
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 9;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(पवमान) सोम ! (स्तोत्रे) प्रशंसा करने वाले यजमान के लिये (सुवीर्यम्) सुन्दर वीर्य को (दधत्) धारण करता हुआ = देता हुआ, (वाजसातमः) अत्यन्त बलदायक, (पवमानः) अभिषूयमाण, (रथीतमः) यज्ञ में रथ से ले जाया जाता है इसलिये अतिरथी, (शुभ्रशस्तमः) अति प्रकाशमान (हरिश्चन्द्रः) हरित वर्ण की चमक वाला, (मरुद्गणः) मरुत = वायुभेद जिसके गण = सहायक हैं, (शुभ्रेमिः) उज्ज्वल (रश्मिभिः) किरणों के साथ (वश्नुहि) विविध प्रकार से व्यापे॥
Footnote
अष्टाध्यायी के प्रमाण और ऋग्वेद ९। ६६। २६–२७ का पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥