Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 129

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
ए꣡न्द्र꣢ सान꣣सि꣢ꣳ र꣣यि꣢ꣳ स꣣जि꣡त्वा꣢नꣳ सदा꣣स꣡ह꣢म् । व꣡र्षि꣢ष्ठमू꣣त꣡ये꣢ भर ॥१२९॥

आ꣢ । इ꣣न्द्र । सानसि꣢म् । र꣣यि꣢म् । स꣣जि꣡त्वा꣢नम् । स꣣ । जि꣡त्वा꣢꣯नम् । स꣣दास꣡ह꣢म् । स꣣दा । स꣡ह꣢꣯म् । व꣡र्षि꣢꣯ष्ठम् । ऊ꣣त꣡ये꣢ । भ꣣र । ॥१२९॥

Mantra without Swara
एन्द्र सानसिꣳ रयिꣳ सजित्वानꣳ सदासहम् । वर्षिष्ठमूतये भर ॥

आ । इन्द्र । सानसिम् । रयिम् । सजित्वानम् । स । जित्वानम् । सदासहम् । सदा । सहम् । वर्षिष्ठम् । ऊतये । भर । ॥१२९॥

Samveda - Mantra Number : 129
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) परमेश्वर ! वा राजन् ! (वर्षिष्ठम्) बहुत और (सानसिन्) संभजनीय (रयिम्) धन को तथा (सदासहम्) सदा प्रहार सह सकने वाले (सजित्वानम्) साथ में विजयी [सेनासमूह] को (ऊतये) रक्षा के लिए (ना, भर) भरती करो॥
परमेश्वर की कृपा और सहायता की अपेक्षा करते हुए राजा को प्रजा की रक्षा के लिए पुष्कल धन तथा सेना भरती करनी चाहिए॥
Footnote
उणादि ४।१०७ अष्टाध्यायी ३।२।७५ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ ऋ० १।८।१ में भी॥