Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1269

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣢ हि꣣तो꣡ वि नी꣢꣯यते꣣ऽन्तः꣢ शु꣣न्ध्या꣡व꣢ता प꣣था꣢ । य꣡दी꣢ तु꣣ञ्ज꣢न्ति꣣ भू꣡र्ण꣢यः ॥१२६९॥

ए꣣षः꣢ । हि꣣तः꣢ । वि । नी꣣यते । अन्त꣡रिति꣢ । शु꣣न्ध्या꣡व꣢ता । प꣣था꣢ । य꣡दि꣢꣯ । तु꣣ञ्ज꣡न्ति꣢ । भू꣡र्ण꣢꣯यः ॥१२६९॥

Mantra without Swara
एष हितो वि नीयतेऽन्तः शुन्ध्यावता पथा । यदी तुञ्जन्ति भूर्णयः ॥

एषः । हितः । वि । नीयते । अन्तरिति । शुन्ध्यावता । पथा । यदि । तुञ्जन्ति । भूर्णयः ॥१२६९॥

Samveda - Mantra Number : 1269
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(यदि) जब (भूर्णयः) भरणशील व बहुत ले चलने वाले याज्ञिक लोग (तुञ्जन्ति) देवतों के लिये देते = यज्ञ करते हैं, तब (एषः) यह सोम (हितः) ढका हुआ (शुन्ध्यावता) शुद्धि वाले (पथा) मार्ग से (अतः) अभिषव स्थान से आहवनीय स्थान को दोनों के बीच में. (वि—नीयते) विशेष सावधानी से ले जाया जाता है॥
Footnote
ऋ० ९। १५। ३ का पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥