Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1218

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- निध्रुविः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ꣣त꣢꣫ त्या ह꣣रि꣢तो꣣ र꣢थे꣣ सू꣡रो꣢ अयुक्त꣣ या꣡त꣢वे । इ꣢न्दु꣣रि꣢न्द्र꣣ इ꣡ति꣢ ब्रु꣣व꣢न् ॥१२१८॥

उ꣣त꣢ । त्याः । ह꣣रि꣡तः꣢ । र꣡थे꣢꣯ । सू꣡रः꣢꣯ । अ꣣युक्त । या꣡त꣢꣯वे । इ꣡न्दुः꣢꣯ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । इ꣡ति꣢꣯ । ब्रु꣣व꣢न् ॥१२१८॥

Mantra without Swara
उत त्या हरितो रथे सूरो अयुक्त यातवे । इन्दुरिन्द्र इति ब्रुवन् ॥

उत । त्याः । हरितः । रथे । सूरः । अयुक्त । यातवे । इन्दुः । इन्द्रः । इति । ब्रुवन् ॥१२१८॥

Samveda - Mantra Number : 1218
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(उत) और (इन्दुः) चन्द्रमा (यातवे) प्रकाशित होकर जाने के लिये (इन्द्रः) सूर्य मुझ में प्रकाशता है (इति) ऐसे (ब्रुवन्) मानो बोलता हुआ (त्याः) उन (सूरः हरितः) सूर्य की किरणों को (रथे) अपने रममणीय मण्डल में (अयुक्त) जोड़ता है।
Footnote
ऋ० ९। ६३। ९ का पाठभेद और उपचारोक्ति संस्कृतभाष्य में देखिये॥