Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1217

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- निध्रुविः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡यु꣢क्त꣣ सू꣢र꣣ ए꣡त꣢शं꣣ प꣡व꣢मानो म꣣ना꣡वधि꣢꣯ । अ꣣न्त꣡रि꣢क्षेण꣣ या꣡त꣢वे ॥१२१७॥

अ꣡यु꣢꣯क्त । सू꣡रः꣢꣯ । ए꣡त꣢꣯शम् । प꣡व꣢꣯मानः । म꣣नौ꣢ । अ꣡धि꣢꣯ । अ꣣न्त꣡रि꣢क्षेण । या꣡त꣢꣯वे ॥१२१७॥

Mantra without Swara
अयुक्त सूर एतशं पवमानो मनावधि । अन्तरिक्षेण यातवे ॥

अयुक्त । सूरः । एतशम् । पवमानः । मनौ । अधि । अन्तरिक्षेण । यातवे ॥१२१७॥

Samveda - Mantra Number : 1217
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(पवमानः) सोम = चन्द्रमा (अन्तरिक्षेण) आकाशमार्ग से (यातवे) प्रकाशित होकर जाने के लिये (सूरः) सूर्य के (एतशम्) किरण को (मनौ अधि) मन रूप आपे में (अयुक्त) युक्त करता है। चन्द्रमा का मानस होना तथा सूर्य से प्रकाश पाना संस्कृतभाष्यस्थ श्रुतियों में देखिये।
Footnote
ऋ० ९। ६३। ८ में भी॥