Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1208

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- उचथ्य आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ꣡ प꣢वस्व मदिन्तम प꣣वि꣢त्रं꣣ धा꣡र꣢या कवे । अ꣣र्क꣢स्य꣣ यो꣡नि꣢मा꣣स꣡द꣢म् ॥१२०८॥

आ । प꣣वस्व । मदिन्तम । पवि꣡त्र꣢म् । धा꣡र꣢꣯या । क꣣वे । अ꣣र्क꣡स्य꣢ । यो꣡नि꣢꣯म् । आ꣣स꣡द꣢म् । आ । सदम् ॥१२०८॥

Mantra without Swara
आ पवस्व मदिन्तम पवित्रं धारया कवे । अर्कस्य योनिमासदम् ॥

आ । पवस्व । मदिन्तम । पवित्रम् । धारया । कवे । अर्कस्य । योनिम् । आसदम् । आ । सदम् ॥१२०८॥

Samveda - Mantra Number : 1208
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(मदिन्तम) हे हृष्टिकारकतम (कवे) क्रान्तकर्मन् ! सोम ! (अर्कस्य) सूर्य के (योनिम्) स्थान प्रकाश में (आसवम्) पहुँचने को (पवित्रम्) पवित्र किरण समूह को (धारया) धारा से (आपवस्व) शोध॥
हृष्टिपुष्टिकारक सोम के होम से पवित्र किरणें भी विशेष परिपूरित होतीं हैं॥
Footnote
ऋ० ९। ५०। ४ में भी॥