Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1191

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡त्या꣢ हिया꣣ना꣢꣫ न हे꣣तृ꣢भि꣣र꣡सृ꣢ग्रं꣣ वा꣡ज꣢सातये । वि꣢꣫ वार꣣म꣡व्य꣢मा꣣श꣡वः꣢ ॥११९१॥

अ꣡त्याः꣢꣯ । हि꣣यानाः꣢ । न । हे꣣तृ꣡भिः꣢ । अ꣡सृ꣢꣯ग्रम् । वा꣡ज꣢꣯सातये । वा꣡ज꣢꣯ । सा꣣तये । वि꣢ । वा꣡र꣢꣯म् । अ꣡व्य꣢꣯म् । आ꣣श꣡वः꣢ ॥११९१॥

Mantra without Swara
अत्या हियाना न हेतृभिरसृग्रं वाजसातये । वि वारमव्यमाशवः ॥

अत्याः । हियानाः । न । हेतृभिः । असृग्रम् । वाजसातये । वाज । सातये । वि । वारम् । अव्यम् । आशवः ॥११९१॥

Samveda - Mantra Number : 1191
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(न) जैसे (आशवः) बाण (हेतृभिः) चलाने वालों से (हियानाः) चलाये हुए (वाजसातये) संग्राम के लिए छोड़े जाते हैं, वैसे ही (अत्याः) निरन्तरं गमनयोग्य सोम मी (अव्यम्) भेड़ के (वारम्) बालमय दशापवित्र को (वि-असृग्रम्) विसृजन किये जाते हैं। पदपाठ में “अत्याः” एक पद होने से जैसा कि सत्यव्रत सामश्रमी जी कहते हैं, सायणाचार्य की “अति —आ” की व्याख्या करना विरुद्ध है।
Footnote
ऋ० ९। १३। ६ में भी॥