Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1183

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
पु꣣नानः꣢ क꣣ल꣢शे꣣ष्वा꣡ वस्त्रा꣢꣯ण्यरु꣣षो꣡ हरिः꣢꣯ । प꣢रि꣣ ग꣡व्या꣢न्यव्यत ॥११८३॥

पुनानः꣢ । क꣣ल꣡शे꣢षु । आ । व꣡स्त्रा꣢꣯णि । अ꣣रुषः꣢ । ह꣡रिः꣢꣯ । प꣡रि꣢꣯ । ग꣡व्या꣢꣯नि । अ꣣व्यत ॥११८३॥

Mantra without Swara
पुनानः कलशेष्वा वस्त्राण्यरुषो हरिः । परि गव्यान्यव्यत ॥

पुनानः । कलशेषु । आ । वस्त्राणि । अरुषः । हरिः । परि । गव्यानि । अव्यत ॥११८३॥

Samveda - Mantra Number : 1183
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(कलशेषु) द्रोण कलशों में (आ) सर्वतः (पुनानः) अभिषूयमाण (अरुषः) प्रकाशमान और (हरिः) अग्निसम्बन्ध से धूम रूप में परिणत होकर हरा हुआ सोम (गव्यानि) किरणमय (वस्त्राणि) वस्त्रों को (पर्यऽव्यत) पहर लेता है॥
Footnote
ऋ० ९। ८। ६ में भी॥