Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1180

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्र꣢स्य सोम꣣ रा꣡ध꣢से पुना꣣नो꣡ हार्दि꣢꣯ चोदय । दे꣣वा꣢नां꣣ यो꣡नि꣢मा꣣स꣡द꣢म् ॥११८०॥

इ꣡न्द्र꣢꣯स्य । सो꣣म । रा꣡ध꣢꣯से । पु꣣नानः꣢ । हा꣡र्दि꣢꣯ । चो꣣दय । देवा꣡ना꣢म् । यो꣡नि꣢꣯म् । आ꣣स꣡द꣢म् । आ꣣ । स꣡द꣢꣯म् ॥११८०॥

Mantra without Swara
इन्द्रस्य सोम राधसे पुनानो हार्दि चोदय । देवानां योनिमासदम् ॥

इन्द्रस्य । सोम । राधसे । पुनानः । हार्दि । चोदय । देवानाम् । योनिम् । आसदम् । आ । सदम् ॥११८०॥

Samveda - Mantra Number : 1180
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(सोम) हे सोम ! तू (पुनानः) अभिषुत किया जाता हुआ (इन्द्रस्य) इन्द्रनामक वायु विशेष दृष्टिकारक की (राधसे) सिद्धि के लिये (हार्दि) हृदय के स्थान को (चोदय) उत्तेजित कर। मैं इसीलिये (देवानांयोनिम्) देवों के स्थान यज्ञ स्थल में (आसदम्) आकर बैठता हूँ॥
Footnote
ऋ० ९। ८। ३ का पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥