Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 118

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- श्रुतकक्षः आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
अ꣢र꣣म꣡श्वा꣢य गायत꣣ श्रु꣡त꣢क꣣क्षा꣢रं꣣ ग꣡वे꣢ । अ꣢र꣣मि꣡न्द्र꣢स्य꣣ धा꣡म्ने꣢ ॥११८॥

अ꣡र꣢꣯म् । अ꣡श्वा꣢꣯य । गा꣣यत । श्रु꣡तक꣢꣯क्षारम् । श्रु꣡त꣢꣯ । क꣣क्ष । अ꣡र꣢꣯म् । ग꣡वे꣢꣯ । अ꣡र꣢꣯म् । इ꣡न्द्र꣢꣯स्य । धा꣡म्ने꣢꣯ ॥११८॥

Mantra without Swara
अरमश्वाय गायत श्रुतकक्षारं गवे । अरमिन्द्रस्य धाम्ने ॥

अरम् । अश्वाय । गायत । श्रुतकक्षारम् । श्रुत । कक्ष । अरम् । गवे । अरम् । इन्द्रस्य । धाम्ने ॥११८॥

Samveda - Mantra Number : 118
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(श्रुतकक्ष) हे वेद को बगल में रखने वाले ! तुम (इन्द्रस्य) इन्द्र के (अश्वाय) किरण के लिए (अरम्) पर्याप्त (गायत) वर्णन करो और उसके (गवे) बाण वा ज्या के लिए (अरम्) पर्याप्त, वर्णन करो तथा उसके (धाम्ने) स्वरूप के लिए (अरम्) पर्याप्त वर्णन करो॥
परमात्मा का उपदेश है कि वेद को कक्ष = बगल में रखने वालो ! तुम शिष्य पुत्रादि मिलकर इन्द्र के किरण, बाण वा ज्या और स्वरूप का पूरा वर्णन करो। इन्द्र जो कि एक प्रकार का विद्युत् है, उसके स्वरूप और उसकी ज्या जो धनुष का एक अंग है जिससे बाण छूटने पर टंकार शब्द होता है अर्थात् बिजुली की कड़क, तथा उसके बाण वा किरण अर्थात् उसकी प्रकाशधाराओं का वर्णन (बखान) करो। उसके विज्ञान से फल प्राप्त करो। वेद को बाहुमूल (बगल) में दबाने वाले से वेदानुगामी समझना चाहिये। लोक में भी प्रसिद्ध है कि जो पुस्तक का अनुगामी होता है उसको पुस्तक बगल में रखने वाला कहते हैं॥
Footnote
उणादि १।१५१ निरुक्त २।५॥ २। ६ इत्यादि के प्रमाण तथा ऋग्वेद ८।९२। २५ में जो अन्तर है वह संस्कृतभाष्य में देखिये॥