Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1163

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ये꣡ सोमा꣢꣯सः परा꣣व꣢ति꣣ ये꣡ अ꣢र्वा꣣व꣡ति꣢ सुन्वि꣣रे꣢ । ये꣢ वा꣣दः꣡ श꣢र्य꣣णा꣡व꣢ति ॥११६३॥

ये꣢ । सो꣡मा꣢꣯सः । प꣣राव꣡ति꣢ । ये । अ꣣र्वाव꣡ति꣢ । सु꣣न्विरे꣢ । ये । वा꣣ । अदः꣢ । श꣣र्यणा꣡व꣢ति ॥११६३॥

Mantra without Swara
ये सोमासः परावति ये अर्वावति सुन्विरे । ये वादः शर्यणावति ॥

ये । सोमासः । परावति । ये । अर्वावति । सुन्विरे । ये । वा । अदः । शर्यणावति ॥११६३॥

Samveda - Mantra Number : 1163
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
समस्त सूक्त का एकत्र ही अन्वय है कि — (ये) जो (सोमासः) सोम (परावति) दूर देश में (ये) और जो (अर्वावति) समीप देश में (ये वा) और जो (अवः) इस (शर्यणावति) भूमि में (ये) और जो (अर्जीकेषु) ऋजु = सरल =सम (कृत्वसु) किये हुए स्थानों में (ये) और जो (पस्त्यानां मध्ये) गृहों के मध्य में (ये वा) और जो (पञ्चसु जनेषु) ४ ऋत्विज् और ५ वां यजमान इन पांचों में (सुन्विरे) अभिषुत किये जाते हैं (ते) वे (स्वानाः) अभिषूयमाण (देवासः) दिव्य (इन्दवः) सोम (नः) हमारे लिये (दिवः परि) आकाश के सकाश से (सुवीर्यम्) जिससे सुन्दर वीर्य होवे (वृष्टिम्) वर्षा को (आ—पवन्ताम्) सर्वत: वर्षावें॥
Footnote
निघण्टु ३। २६॥ २। १६॥ ३। ४ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥
ऋग्वेद ९। ६५। २२ — २३ — २४ में भी॥