Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1139

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ꣢ र꣣यि꣡मा सु꣢꣯चे꣣तु꣢न꣣मा꣡ सु꣢क्रतो त꣣नू꣢ष्वा । पा꣢न्त꣣मा꣡ पु꣢रु꣣स्पृ꣡ह꣢म् ॥११३९॥

आ । र꣣यि꣢म् । आ । सु꣣चेतु꣡न꣢म् । सु꣣ । चेतु꣡न꣢म् । आ । सु꣣क्रतो । सु । क्रतो । तनू꣡षु꣢ । आ । पा꣡न्त꣢꣯म् । आ । पु꣣रुस्पृ꣡ह꣢म् । पु꣣रु । स्पृ꣡ह꣢꣯म् ॥११३९॥

Mantra without Swara
आ रयिमा सुचेतुनमा सुक्रतो तनूष्वा । पान्तमा पुरुस्पृहम् ॥

आ । रयिम् । आ । सुचेतुनम् । सु । चेतुनम् । आ । सुक्रतो । सु । क्रतो । तनूषु । आ । पान्तम् । आ । पुरुस्पृहम् । पुरु । स्पृहम् ॥११३९॥

Samveda - Mantra Number : 1139
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(सुक्रतो) हे यज्ञ सुधारने वाले ! हम (रयिम्) सोम रूपी धन का (आ) सर्वतः वरण करते हैं (सुचेतुनम्) बुद्धि सुधारने वाले सोम जलों में छुआ मिला हुआ (अव्याः) भेड़ के (बारे) बाल के ऊनी दशापवित्र पर (परि सीदति) रहता है और (रेभः) अभिषव के समय उपरवों का (आ) वरण करते हैं (तनूषु) हम अपने देहों के निमित्त (आ) सोम का वरण करते हैं पान्तमा पु० का अर्थ पूर्व किया गया॥
Footnote
ऋ० ९। ६५। ३० में॥