Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1112

1875 Mantra
Devata- विश्वे देवाः Rishi- भुवन आप्त्यः साधनो वा भौवनः Chhand- द्विपदा त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ꣣दित्यै꣢꣫रिन्द्रः꣣ स꣡ग꣢णो म꣣रु꣡द्भि꣢र꣣स्म꣡भ्यं꣢ भेष꣣जा꣡ क꣢रत् ॥१११२॥

आ꣣दित्यैः꣢ । आ꣣ । दित्यैः꣢ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । स꣡ग꣢꣯णः । स । ग꣣णः । मरु꣡द्भिः꣢ । अ꣣स्म꣡भ्य꣢म् । भे꣣षजा꣢ । क꣣रत् ॥१११२॥

Mantra without Swara
आदित्यैरिन्द्रः सगणो मरुद्भिरस्मभ्यं भेषजा करत् ॥

आदित्यैः । आ । दित्यैः । इन्द्रः । सगणः । स । गणः । मरुद्भिः । अस्मभ्यम् । भेषजा । करत् ॥१११२॥

Samveda - Mantra Number : 1112
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
पूर्वमन्त्र में जो यह कहा गया कि परमेश्वर सूर्य किरणादि द्वारा हमारे यज्ञों और शरीर तथा सन्तानादि को सावे। उस में यह आशंका करके कि सूर्यादि यज्ञ तो अवश्य सिद्ध होता है परन्तु सन्तानादि पर सूर्यादि का प्रभाव किस प्रकार है ? कहते हैं कि (इन्द्रः) परमेश्वर सर्व शक्तिमान् (आदित्यैः) सूर्यकिरणों और (मरुद्भिः) विविध वायुयों से (सगणः) गण सहित (अस्मभ्यम्) हमारे लिये (भेषजा) औषधें (करत्) करे॥
यह तो प्रसिद्ध ही है कि सूर्य की किरणों और वायुओं से ही अनेक औषध उत्पन्न होते हैं जिनसे हमारे देह सन्तान आदि उत्पन्न और रक्षित होते हैं। और अब तो सूर्य किरणादि से ही साक्षात् अनेक रोगों से दूर करने की रीति पर चिकित्सा होने लगी है, तब कहना ही क्या शेष !॥३॥
Footnote
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