Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1108

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- बन्धुः सुबन्धुः श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुश्च क्रमेण गौपायना लौपायना वा Chhand- द्विपदा विराट् Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
व꣡सु꣢र꣣ग्नि꣡र्वसु꣢꣯श्रवा꣣ अ꣡च्छा꣢ नक्षि द्यु꣣म꣡त्त꣢मो र꣣यिं꣡ दाः꣢ ॥११०८॥

व꣡सुः꣢꣯ । अ꣣ग्निः꣢ । व꣡सु꣢꣯श्रवाः । व꣡सु꣢꣯ । श्र꣣वाः । अ꣡च्छ꣢꣯ । न꣣क्षि । द्युम꣡त्त꣢मः । र꣣यि꣢म् । दाः꣣ ॥११०८॥

Mantra without Swara
वसुरग्निर्वसुश्रवा अच्छा नक्षि द्युमत्तमो रयिं दाः ॥

वसुः । अग्निः । वसुश्रवाः । वसु । श्रवाः । अच्छ । नक्षि । द्युमत्तमः । रयिम् । दाः ॥११०८॥

Samveda - Mantra Number : 1108
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(वसुः) सर्व के वास कराने वाले (अग्निः) प्रकाशक (वसुश्रवाः) धनी यशस्वी और (द्युमत्तमः) अतिप्रकाशमान ! आप (अच्छ) भले प्रकार सामने (नक्षि) प्राप्त हूजिये और (रयिम्) विद्यादि धन (दाः) दीजिये॥
Footnote
ऋ० ५। २४। २ का पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥