Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1062

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- जमदग्निर्भार्गवः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣भि꣡ गव्या꣢꣯नि वी꣣त꣡ये꣢ नृ꣣म्णा꣡ पु꣢ना꣣नो꣡ अ꣢र्षसि । स꣣न꣡द्वा꣢जः꣣ प꣡रि꣢ स्रव ॥१०६२॥

अ꣣भि꣢ । ग꣡व्या꣢꣯नि । वी꣣त꣡ये꣢ । नृ꣣म्णा꣢ । पु꣣नानः꣢ । अ꣣र्षसि । सन꣡द्वा꣢जः । स꣣न꣢त् । वा꣣जः । प꣡रि꣢꣯ । स्र꣣व ॥१०६२॥

Mantra without Swara
अभि गव्यानि वीतये नृम्णा पुनानो अर्षसि । सनद्वाजः परि स्रव ॥

अभि । गव्यानि । वीतये । नृम्णा । पुनानः । अर्षसि । सनद्वाजः । सनत् । वाजः । परि । स्रव ॥१०६२॥

Samveda - Mantra Number : 1062
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(सनद्वाजः) अन्नोत्पादन से अन्नदाता (पुनानः) शुद्धिकारक सोम (नृम्णा) धन के समान अतिप्रिय (गव्यानि) सूर्य किरणगत भापों में (अभिअर्षसि) व्यापता और (परिस्रव) वर्षता है॥
Footnote
ऋ० ९। ६२। २३ में भी॥