Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1061

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- जमदग्निर्भार्गवः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ते꣡ सोमा꣢꣯ असृक्षत गृणा꣣नाः꣡ शव꣢꣯से म꣣हे꣢ । म꣣दि꣡न्त꣢मस्य꣣ धा꣡र꣢या ॥१०६१॥

ए꣣ते꣢ । सो꣡माः꣢꣯ । अ꣢सृक्षत । गृणानाः꣢ । श꣡व꣢꣯से । म꣣हे꣢ । म꣣दि꣡न्त꣢मस्य । धा꣡र꣢꣯या ॥१०६१॥

Mantra without Swara
एते सोमा असृक्षत गृणानाः शवसे महे । मदिन्तमस्य धारया ॥

एते । सोमाः । असृक्षत । गृणानाः । शवसे । महे । मदिन्तमस्य । धारया ॥१०६१॥

Samveda - Mantra Number : 1061
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(मदिन्तमस्य) अत्यन्त हृष्टिकारक सोम की (धारया) धारा (एते) ये (सोमाः) सोमरस (गृणानाः) प्रशंसित किये जाते हुए (महे) बड़े (शवसे) बल के लिये (असृक्षत) अग्नि में छोड़े जाते हैं॥
Footnote
ऋ० ९। ६२। २२ का पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥