Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1058

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अवत्सारः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ꣣स्रा꣡ वे꣢द꣣ व꣡सू꣢नां꣣ म꣡र्त꣢स्य दे꣣व्य꣡व꣢सः । त꣢र꣣त्स꣢ म꣣न्दी꣡ धा꣢वति ॥१०५८॥

उ꣣स्रा꣢ । उ꣣ । स्रा꣢ । वे꣣द । व꣡सू꣢꣯नाम् । म꣡र्त꣢꣯स्य । दे꣣वी꣢ । अ꣡व꣢꣯सः । त꣡र꣢꣯त् । सः । म꣣न्दी꣢ । धा꣣वति ॥१०५८॥

Mantra without Swara
उस्रा वेद वसूनां मर्तस्य देव्यवसः । तरत्स मन्दी धावति ॥

उस्रा । उ । स्रा । वेद । वसूनाम् । मर्तस्य । देवी । अवसः । तरत् । सः । मन्दी । धावति ॥१०५८॥

Samveda - Mantra Number : 1058
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(वसूनाम्) धनों की (उत्सा) देने वाली (देवी) प्रकाशमाना [सोमधारा] (मर्त्तस्य) मनुष्य की (अवसः) रक्षा करना (वेद) जानती है (सः) वह (मन्दी) हृष्टिपुष्टिकारक सोम (तरत्) त्वरा करता हुआ (धावति) गमन करता है॥
Footnote
ऋ० ९। ५८। २ में भी॥