Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1047

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- हिरण्यस्तूप आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣡ना꣢ च सोम꣣ जे꣡षि꣢ च꣣ प꣡व꣢मान꣣ म꣢हि꣣ श्र꣡वः꣢ । अ꣡था꣢ नो꣣ व꣡स्य꣢सस्कृधि ॥१०४७॥

स꣡न꣢꣯ । च꣣ । सोम । जे꣡षि꣢꣯ । च꣣ । प꣡व꣢꣯मान । म꣡हि꣢꣯ । श्र꣡वः꣢꣯ । अ꣡थ꣢꣯ । नः꣣ । व꣡स्य꣢꣯सः । ꣣कृधि ॥१०४७॥

Mantra without Swara
सना च सोम जेषि च पवमान महि श्रवः । अथा नो वस्यसस्कृधि ॥

सन । च । सोम । जेषि । च । पवमान । महि । श्रवः । अथ । नः । वस्यसः । कृधि ॥१०४७॥

Samveda - Mantra Number : 1047
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(महिश्रवः) हे महाकीर्ते ! (पवमान) पवित्र ! (सोम) वा परमेश्वर ! (सना च) धनादि दान का अनुग्रह करो (जेषि च) और विजय करो (अथ) और (नः) हम को (वस्वसः) श्रेष्ठ (कृधि) करो॥
सोम के पक्ष में: – दानादि के अनुग्रहादि की संगति, वैद्यक के वातपित्तादि के अनुग्रह कथन के समान जानिये॥
Footnote
यह पूरा सूक्त ऋग्वेद ९। ४। १–१०, में दशों ऋचाओं का आया है। केवल ८वीं में “वाजिन् = रयिम्” इतना पाठभेद है॥