Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 102

1875 Mantra
Devata- अदितिः Rishi- इरिम्बिठिः काण्वः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
उ꣣त꣢꣫ स्या नो꣣ दि꣡वा꣢ म꣣ति꣡रदि꣢꣯तिरू꣣त्या꣡ग꣢मत् । सा꣡ शन्ता꣢꣯ता꣣ म꣡य꣢स्कर꣣द꣢प꣣ स्रि꣣धः꣢ ॥१०२॥

उ꣣त꣢ । स्या । नः꣣ । दि꣡वा꣢꣯ । म꣣तिः꣢ । अ꣡दि꣢꣯तिः । अ । दि꣣तिः । ऊत्या꣢ । आ । ग꣢मत् । सा꣢ । श꣡न्ता꣢꣯ता । शम् । ता꣣ता । म꣡यः꣢꣯ । क꣣रत् । अ꣡प꣢꣯ । स्रि꣡धः꣢꣯ ॥१०२॥

Mantra without Swara
उत स्या नो दिवा मतिरदितिरूत्यागमत् । सा शन्ताता मयस्करदप स्रिधः ॥

उत । स्या । नः । दिवा । मतिः । अदितिः । अ । दितिः । ऊत्या । आ । गमत् । सा । शन्ताता । शम् । ताता । मयः । करत् । अप । स्रिधः ॥१०२॥

Samveda - Mantra Number : 102
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 11;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(उत) और (स्या) वह (मतिः) पूर्वोक्त मेधा (अदितिः) [अखण्डिता स्थिर अदिति नाग देवता] बुद्धि (नः) हमको (ऊत्या) रक्षा के साथ (दिवा) जागरणकाल में (आगमत्) प्राप्त होवे और (सा) वह (शन्ताता) सुखकरी (मयः) सुख को (करत्) करे और (स्त्रिधः) शत्रुओं को (अप) दूर करे।
यह स्पष्ट है कि सर्व सुखों का मूल शुद्धमति ही है। बुद्धि के अभाव में सब दुःख घेरते हैं तथा शत्रु दबाते हैं। इसलिये पूर्वोक्त मन्त्र में कहे प्रकार से अग्नि की ७ प्रकार की लपटों से शुद्ध हुआ पवन हमारी बुद्धियों को पवित्र करे जिससे वह बुद्धि सुख दे और शत्रुओं को दूर करे, रक्षा हो। इससे और गायत्री मन्त्र द्वारा जो सब आर्य लोग बुद्धि ही को वेदानुसार सर्व बलों और सर्व धनों से अधिक मानकर मांगते हैं, यह वैदिकधर्म के उच्चभाव का कारण समझना चाहिए॥
Footnote
ऋ० ८।१८। ७ शन्तातिः॥