Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 977

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अवत्सारः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ꣣त꣡ नो꣢ गो꣣वि꣡द꣢श्व꣣वि꣡त्पव꣢꣯स्व सो꣣मा꣡न्ध꣢सा । म꣣क्षू꣡त꣢मेभि꣣र꣡ह꣢भिः ॥९७७॥

उत꣢ । नः꣣ । गोवि꣢त् । गो꣣ । वि꣢त् । अ꣣श्ववि꣢त् । अ꣣श्व । वि꣢त् । प꣡व꣢꣯स्व । सो꣣म । अ꣡न्ध꣢꣯सा । म꣣क्षू꣡त꣢मेभिः । अ꣡ह꣢꣯भिः । अ । ह꣣भिः ॥९७७॥

Mantra without Swara
उत नो गोविदश्ववित्पवस्व सोमान्धसा । मक्षूतमेभिरहभिः ॥

उत । नः । गोवित् । गो । वित् । अश्ववित् । अश्व । वित् । पवस्व । सोम । अन्धसा । मक्षूतमेभिः । अहभिः । अ । हभिः ॥९७७॥

Samveda - Mantra Number : 977
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (सोम) = सब ऐश्वर्यों को जन्म देनेवाले प्रभो ! [षु-उत्पन्न करना] आप (नः) = हमें (अन्धसः) = अन्न के द्वारा — अथवा सात्त्विक अन्न से उत्पन्न सोम-शक्ति के द्वारा १. (गोवित्) = उत्तम ज्ञानेन्द्रियों को प्राप्त कराइए [गमयन्ति अर्थान् इति गावः] । २. (अश्ववित्) = [अश्नुते कर्मणि] उत्तम कर्मेन्द्रियों को प्राप्त कराइए । ३. इस प्रकार जीवनों को (पवस्व) = पवित्र कर दीजिए । ४. (उत) = और (मक्षूतमेभिः अहभिः) = अधिक-से-अधिक सत्यवाले दिनों के साथ पवस्व हमें प्राप्त होओ [मक्षु=truly]।

हे प्रभो! आपसे उत्पादित सात्त्विक अन्न के और उससे उत्पन्न सोम के हमारे जीवनों में ये परिणाम हों कि—१. हमारी ज्ञानेन्द्रियाँ उत्तम हों, २. हमारी कर्मेन्द्रियाँ भी उत्तम हों, ३. हमारा जीवन पवित्र हो और ४. हम अपने दैनन्दिन व्यवहार में अधिक से अधिक सत्य बोलें ।
Essence
सात्त्विक अन्न के परिणामस्वरूप हम उत्तम ज्ञानेन्द्रियों और उत्तम कर्मेन्द्रियों की पवित्रता तथा सत्य जीवन को प्राप्त करें ।
Subject
सात्त्विक अन्न के चार परिणाम