Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 975

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अवत्सारः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
य꣡वं꣢यवं नो꣣ अ꣡न्ध꣢सा पु꣣ष्टं꣡पु꣢ष्टं꣣ प꣡रि꣢ स्रव । वि꣡श्वा꣢ च सोम꣣ सौ꣡भ꣢गा ॥९७५॥

य꣡वंय꣢꣯वम् । य꣡व꣢꣯म् । य꣣वम् । नः । अ꣡न्ध꣢꣯सा । पु꣣ष्टं꣡पु꣢ष्टम् । पु꣣ष्ट꣢म् । पु꣣ष्टम् । प꣡रि꣢꣯ । स्र꣣व । वि꣡श्वा꣢꣯ । च꣣ । सोम । सौ꣡भ꣢꣯गा । सौ । भ꣣गा ॥९७५॥

Mantra without Swara
यवंयवं नो अन्धसा पुष्टंपुष्टं परि स्रव । विश्वा च सोम सौभगा ॥

यवंयवम् । यवम् । यवम् । नः । अन्धसा । पुष्टंपुष्टम् । पुष्टम् । पुष्टम् । परि । स्रव । विश्वा । च । सोम । सौभगा । सौ । भगा ॥९७५॥

Samveda - Mantra Number : 975
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
अवत्सार= सारभूत सोम की रक्षा करनेवाला काश्यप- ज्ञानी प्रभु से प्रार्थना करता है कि (अन्धसा) = अन्न के दृष्टिकोण से अथवा अन्न से उत्पन्न होनेवाले सोम के दृष्टिकोण से (न:) = हमें (यवंयवं) = यव तथा यव-जो-जैसे अन्नों को, जो हमें प्राणशक्ति से मिश्रित करनेवाले [यु मिश्रणे] तथा दोषों को दूर करनेवाले हैं [यु अमिश्रणे] तथा (पुष्टंपुष्टम्) = प्रत्येक पुष्टिकारक अन्न को (परिस्रव) = प्राप्त कराइए । (च) = तथा हे (सोम) = सब ऐश्वर्यों को जन्म देनेवाले प्रभो ! आप विश्वा (सौभगा) = सब सौभाग्यों को (परिस्रव) = हमें प्राप्त कराइए । सौभग शब्द का अर्थ आनन्द good luck, happiness तथा समृद्धि prosperity है । अवत्सार प्रभु से प्रार्थना करता है कि उसे जहाँ पौष्टिक, स्वास्थ्यप्रद अन्न की कमी न रहे, वहाँ सब सुख व समृद्धि भी प्राप्त हो, इन्हें प्राप्त करके वह आध्यात्मिक उन्नति में अपना समय लगा सके ।
Essence
हमें पौष्टिक, स्वास्थ्यप्रद अन्न प्राप्त हो, सुख व समृद्धि सुलभ हो ।
Subject
स्वास्थ्यप्रद अन्न, सुख व समृद्धि