Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 965

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त्व꣡ꣳ सो꣢म नृ꣣मा꣡द꣢नः꣣ प꣡व꣢स्व चर्षणी꣣धृ꣡तिः꣢ । स꣢स्नि꣣र्यो꣡ अ꣢नु꣣मा꣡द्यः꣢ ॥९६५॥

त्वम् । सो꣣म । नृमा꣡द꣢नः । नृ꣣ । मा꣡द꣢꣯नः । प꣡व꣢꣯स्व । च꣣र्षणीधृ꣡तिः꣢ । च꣣र्षणि । धृ꣡तिः꣢꣯ । स꣡स्निः꣢꣯ । यः । अ꣣नुमा꣡द्यः꣢ । अ꣣नु । मा꣡द्यः꣢꣯ ॥९६५॥

Mantra without Swara
त्वꣳ सोम नृमादनः पवस्व चर्षणीधृतिः । सस्निर्यो अनुमाद्यः ॥

त्वम् । सोम । नृमादनः । नृ । मादनः । पवस्व । चर्षणीधृतिः । चर्षणि । धृतिः । सस्निः । यः । अनुमाद्यः । अनु । माद्यः ॥९६५॥

Samveda - Mantra Number : 965
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (सोम) = शान्त विद्वन् ! (त्वम्) = तू १. (नृमादनः) = मनुष्यों को उत्साहित करनेवाला होता है । तू उन्हें आत्मज्ञान देकर आत्मगौरव की भावना से भरता है । तू २. (चर्षणीधृतिः) = मनुष्यों का धारण करनेवाला बनकर (पवस्व) = गतिशील हो । आत्मतृप्त होने से स्वयं तेरे लिए कुछ भी कर्त्तव्य नहीं है तो भी लोकसंग्रह के लिए तू कर्म कर ही । ३. (सस्नि:) = तू अत्यन्त शुद्ध करनेवाला है और ४. तू वह है (य:) = जो (अनुमाद्यः) = सदा लोगों से प्रशंसनीय [Cheers देने योग्य] होता है। इसके पवित्रकारक, उत्साहजनक, उपदेश लोगों को ऐसा प्रभावित करते हैं कि वे इसकी प्रशंसा में उच्च नाद कर उठते हैं।
 
Essence
ज्ञानी कर्म करता हुआ लोगों में उत्साह का संचार करे ।
Subject
लोगों में उत्साह का संचार