Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 918

1875 Mantra
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
मा꣡ पा꣢प꣣त्वा꣡य꣢ नो न꣣रे꣡न्द्रा꣢ग्नी꣣ मा꣡भिश꣢꣯स्तये । मा꣡ नो꣢ रीरधतं नि꣣दे꣢ ॥९१८॥

मा । पा꣣पत्वा꣡य꣢ । नः꣣ । नरा । इ꣡न्द्रा꣢꣯ग्नी । इ꣡न्द्र꣢꣯ । अ꣣ग्नीइ꣡ति꣢ । मा । अ꣣भि꣡श꣢स्तये । अ꣣भि꣢ । श꣣स्तये । मा꣢ । नः꣣ । रीरधतम् । निदे꣢ ॥९१८॥

Mantra without Swara
मा पापत्वाय नो नरेन्द्राग्नी माभिशस्तये । मा नो रीरधतं निदे ॥

मा । पापत्वाय । नः । नरा । इन्द्राग्नी । इन्द्र । अग्नीइति । मा । अभिशस्तये । अभि । शस्तये । मा । नः । रीरधतम् । निदे ॥९१८॥

Samveda - Mantra Number : 918
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (इन्द्राग्नी) = बल व प्रकाश की देवताओ ! (नरा) = आप दोनों ही मुझे इस जीवन-पथ पर आगे ले-चलनेवाले हो और (न:) = हमें (पापत्वाय) = किसी पाप कर्म के लिए (मा) = मत (रीरधतम्) = वश में करो। हम पाप करने के लिए विवश न हो जाएँ । २. (अभिशस्तये) = हिंसा के लिए अथवा दोषारोपण के लिए (मा) = मत वशीभूत करो। हम किसी की हिंसा न करें—किसी पर व्यर्थ दोषारोपण न करें। ३. (नः) = हमें (निदे) = निन्दा के लिए, घृणा के लिए, उपहास के लिए [censure, despise, mock] (मा) = मत वश में करो ।

वस्तुतः बल और ज्ञान से सम्पन्न व्यक्ति–‘ब्रह्म और क्षत्र' के विकासवाला व्यक्ति करता है, न हिंसा, न निन्दा ! इन बातों की ओर उसका झुकाव नहीं रहता।
Essence
मैं ब्रह्म व क्षत्र का विकास करके पाप, हिंसा व निन्दा से ऊपर उठूँ ।
Subject
पाप, हिंसा व निन्दा से ऊपर