Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 917

1875 Mantra
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
शृ꣣णुतं꣡ ज꣢रि꣣तु꣢꣫र्हव꣣मि꣡न्द्रा꣢ग्नी꣣ व꣡न꣢तं꣣ गिरः꣢ । ई꣢शाना꣡ पि꣢प्यतं꣣ धि꣡यः꣢ ॥९१७॥

शृणुत꣢म् । ज꣣रितुः꣢ । ह꣡व꣢꣯म् । इ꣡न्द्रा꣢꣯ग्नी । इ꣡न्द्र꣢꣯ । अ꣣ग्नीइ꣡ति꣢꣯ । व꣡न꣢꣯तम् । गि꣡रः꣢꣯ । ई꣣शाना꣢ । पि꣣प्यतम् । धि꣡यः꣢꣯ ॥९१७॥

Mantra without Swara
शृणुतं जरितुर्हवमिन्द्राग्नी वनतं गिरः । ईशाना पिप्यतं धियः ॥

शृणुतम् । जरितुः । हवम् । इन्द्राग्नी । इन्द्र । अग्नीइति । वनतम् । गिरः । ईशाना । पिप्यतम् । धियः ॥९१७॥

Samveda - Mantra Number : 917
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. हे (इन्द्राग्नी) = प्रकाश व बल के अधिदेवताओ! (जरितुः) = स्तोता की (हवम्) = पुकार को (शृणुतम्) = सुनो, अर्थात् मेरी प्रार्थना को सुनो । 'जरिता' वस्तुतः वह स्तोता है जो अपनी आयु को उस स्तोतव्य के गुणों को अपने जीवन में अनूदित करने में ही जीर्ण कर देता है [जृ=जरिता, जृ= वयोहानि] । २. तुम (गिरः) = वाणियों का (वनतम्) = सेवन करो । मेरे प्रार्थनावचनों को सुनकर आप फल देनेवाले हो । ३. (ईशाना) - हे ऐश्वर्यवाले देवो! अथवा सबके ईशान देवो ! (धियः) = हमारी बुद्धियों को (पिप्यतम्) = आप्यायित करो। हमारी बुद्धियों के वर्धन करनेवाले होओ। 
Essence
हम इन्द्र और अग्नि का स्तवन करें, वे हमारी बुद्धियों को आप्यायित करें ।
Subject
बुद्धियों का आप्यायन