Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 912

1875 Mantra
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ता꣢ स꣣म्रा꣡जा꣢ घृ꣣ता꣡सु꣢ती आदि꣣त्या꣡ दानु꣢꣯न꣣स्प꣡ती꣢ । स꣡चे꣢ते꣣ अ꣡न꣢वह्वरम् ॥९१२॥

ता꣢ । स꣣म्रा꣡जा꣢ । स꣣म् । रा꣡जा꣢꣯ । घृ꣣ता꣡सु꣢ती । घृ꣡त꣢ । आ꣣सुतीइ꣡ति꣢ । आ꣣दित्या꣢ । आ꣣ । दित्या꣢ । दा꣡नु꣢꣯नः । पती꣢꣯इ꣢ति꣢ । स꣡चे꣢꣯ते꣣इ꣡ति꣢ । अ꣡न꣢꣯वह्वरम् । अन् । अ꣣वह्वरम् ॥९१२॥

Mantra without Swara
ता सम्राजा घृतासुती आदित्या दानुनस्पती । सचेते अनवह्वरम् ॥

ता । सम्राजा । सम् । राजा । घृतासुती । घृत । आसुतीइति । आदित्या । आ । दित्या । दानुनः । पतीइति । सचेतेइति । अनवह्वरम् । अन् । अवह्वरम् ॥९१२॥

Samveda - Mantra Number : 912
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(ता) = वे दोनों पति-पत्नी १. (सम्राजा) = अपनी इन्द्रियों, मन व बुद्धि पर पूर्ण प्रभुत्ववाले हों, अतएव सम्यग् राजमान–दीप्त हों, २. (घृतासुती) = [घृ- दीप्ति, सु- उत्पत्ति] अपने जीवन में दीप्ति की उत्पत्तिवाले हों। उनका शरीर स्वास्थ्य की दीप्ति से, मन सत्य की दीप्ति से तथा बुद्धि ज्ञान की दीप्ति से चमके । ३. (आदित्या) = [आदानात्] ये सदा गुणों का आदान करनेवाले हों, ४. (दानुनस्पती) = ये दान के पति हों [नि० २.१३], सदा यज्ञ करके यज्ञशेष के खानेवाले हों । ५. .ये ऐसे हों जो (अन्वह्वरम्) = अकुटिलता का (सचेते) = सेवन करते हों, जिसमें कुटिलता का सम्पर्क ही न हो । ऋजु-मार्ग से चलनेवाले हों।
Essence
पति-पत्नी संयमी, ज्ञान की दीप्तिवाले, गुणग्राही, दानशील तथा ऋजु-चलनेवाले हों ।
Subject
ऋजु - मार्ग