Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 896

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- मेध्यातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡व꣢स्व विश्वचर्षण꣣ आ꣢ म꣣ही꣡ रोद꣢꣯सी पृण । उ꣣षाः꣢꣫ सूर्यो꣣ न꣢ र꣣श्मि꣡भिः꣢ ॥८९६॥

प꣡व꣢꣯स्व । वि꣣श्चर्षणे । विश्व । चर्षणे । आ꣢ । म꣣ही꣡इति꣢ । रो꣡द꣢꣯सी꣣इ꣡ति꣢ । पृ꣣ण । उषाः꣢ । सू꣡र्यः꣢꣯ । न । र꣣श्मि꣡भिः꣢ ॥८९६॥

Mantra without Swara
पवस्व विश्वचर्षण आ मही रोदसी पृण । उषाः सूर्यो न रश्मिभिः ॥

पवस्व । विश्चर्षणे । विश्व । चर्षणे । आ । महीइति । रोदसीइति । पृण । उषाः । सूर्यः । न । रश्मिभिः ॥८९६॥

Samveda - Mantra Number : 896
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. हे (विश्वचर्षणे) = विश्वद्रष्ट: - सम्पूर्ण संसार का ध्यान [Look after] करनेवाले प्रभो ! (आपवस्व) = आप हमें प्राप्त होओ और हमारे जीवनों को पवित्र करो । २. (मही रोदसी) = महनीय द्युलोक व पृथिवीलोक को (आपृण) = भर दीजिए । आधिदैविक जगत् के भी द्युलोक व पृथिवीलोक हैं, उन्हें (न) = जैसे (उषा:) = उष:काल तथा (सूर्यः) = सूर्य (रश्मिभिः) = प्रकाश की किरणों से भर देते हैं, उसी प्रकार आप अध्यात्म जगत् के पृथिवीलोक व द्युलोक को, अर्थात् शरीर व मस्तिष्क को, जो अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं, प्रकाश से परिपूर्ण करने की कृपा करें । मेरा शरीर नीरोगता के कारण स्वास्थ्य के प्रकाश से चमके तथा मेरा मस्तिष्क ज्ञान की ज्योति से परिपूर्ण हो ।
Essence
हमारा शरीर स्वस्थ हो और मस्तिष्क दीप्त बने । अन्धकार का दहन करनेवाली उषा [उष् दाहे] शरीर के रोगों का दहन कर दे और द्युलोक को जगमगानेवाला सूर्य मस्तिष्करूप द्युलोक को ज्योतिर्मय कर दे ।